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bhasha
बीसवीं शताब्दी के हिंदी के सर्वमान्य महान् आलोचक डॉ. रामविलास शर्मा की साहित्यिक समझ और प्रतिबद्धता का विस्तार इस ग्रंथ की संकलित सामग्री में आद्यंत दिखाई पड़ते हैं। शोध और समीक्षा के प्रतिमान स्थापित करता यह ग्रंथ प्रत्येक बुकशेल्फ की अनिवार्यता है।
ISBN : 978-93-82114-17-8
Pages: 364
Edition: 2021
Format: Hardback
₹850.00
acharyaramchandrashukla
भारतीय और पाश्चात्य साहित्य, साहित्यालोचन, ज्ञान-विज्ञान के विविध क्षेत्रों की सामग्री ने आचार्य रामचन्द्र शुक्ल की प्रतिभा के लिए उद्दीपन का कार्य किया। बुद्धि की आंच उनमें इतनी तेज है कि वे तथ्यों को तपा-पिघलाकर उसके तत्त्वों को परख लेते हैं।
ISBN : 978-93-84788-19-3
Pages: 432
Edition: 2016
Format: Hardback
₹695.00
acharyahazarikuchsansmaran
इस पुस्तक की विशेषता यह है कि द्विवेदी जी का संस्मरणात्मक मूल्यांकन प्रायः सभी पक्षों से किया गया है। इस अर्थ में इसे आलोचना की आंख से भी पढ़ा जा सकता है। समग्रतः एक विराट् व्यक्तित्व और उसके कालजयी कृतित्व का समवेत संस्मरणात्मक अनुशीलन। पठनीय व संग्रहणीय पुस्तक।
ISBN : 978-93-83234-58-5
Pages: 294
Edition: 2018
Format: Hardback
₹500.00
prachinbharatkinitiyna
हमारे आर्यावर्त्त देश में जनतंत्र और लोकतंत्र चलाने के लिए कैसी नीतियाँ थीं, उसके बाद कैसी नीतियाँ रहीं और अब कौन-सी नीतियाँ हैं, इस दिशा में इस ग्रंथ के संपादन एवं प्रकाशन में महत्त्वपूर्ण प्रयास किया गया है।
ISBN : 978-81-89982-53-9
Pages: 308
Edition: 2021
Format: Hardback
₹650.00
lalit
‘ललित निबन्ध स्वरूप एवं परम्परा’ पुस्तक में लेखक डॉ. श्रीराम परिहार की संवेदनशील दृष्टि एवं शोधपरक चिन्तन के स्वरूप का समन्वय गोचर होता है। लेखक ने ललित निबन्ध के स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए उसे एक शास्त्र के रूप में देखा है और हिन्दी के आदि या प्रथम ललित निबन्धकार की खोज की है।
ISBN : 978-81-89982-79-9
Pages: 392
Edition: 2021
Format: Hardback
₹850.00
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