Category: आज की किताब

रामविलास शर्मा तथा अमृतलाल नागर के पत्र बंबई11.3.45 प्रिय विलास,रमेश से भेंट हुई। निरालाजी के स्वास्थ्य के सम्बन्ध में मैंने उन्हें आंखों देखी, कानों सुनी…

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बाज़ार से हम बच नहीं सकते बाज़ार से हम बच नहीं सकते और जो राहें निकालीं पूर्वजों ने राहें जो मंगल भरी हैं उन अलक्षित…

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श्री अरविंद का पत्र मृणालिनी के नाम (श्री अरविंद: बंगाल-विभाजन के समय का सुप्रसिद्ध क्रांतिकारी, जो बाद में राजनीति से ‘संन्यास’ लेकर धर्म की शरण…

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इंस्पेक्टर मातादीन चहुंओर समाया : नरेन्द्र कोहली परसाई जी की रचनाएं मैंने ‘धर्मयुग’ में अपने उस वय में पढ़नी आरंभ की थी, जब न तो…

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हिंदुत्व के रखवाले “कल मैं अपनी बात पूरी नहीं कर पाया क्योंकि तुम कुछ थके से लग रहे थे।’ ‘थका नहीं था, यह जो धर्म-वर्म…

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इतिहासपुरुष ‘तानाशाही के खतरे वाली जो बात तुम कर रहे थे वह तो सचमुच संभव लगती है। इस आदमी में तानाशाही प्रवृत्ति कूट-कूटकर भरी है।…

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