Sale!

Bantadhaar

150.00 127.50

ISBN: 978-81-88466-84-9
Edition: 2010
Pages: 112
Language: Hindi
Format: Hardback


Author : Nisha Bhargava

Compare
Category:

Description

निशा भार्गव की कविताएँ गहरे मानवीय सरोकारों का प्रतिनिधित्व करती हैं । गम्भीरता से, सपाट भाव से किसी बात या संदेश को व्यक्त कर देना शायद हमें आसान लगे लेकिन हास्य-व्यंग्य के माध्यम से ‘सर्व’ को अभिव्यक्ति ‘स्व’ से आसान नहीं । यहीं निशा भार्गव अपनी कविताओं की भाषा-शैली और प्रवृति से भीड में अपना अलग स्थान बनाती हैं । उनकी अपनी खास शैली है जो अन्यत्र दिखाई नहीं पड़ती । छंदमुक्त, इन कविताओं में एक प्रवाह होता है, गीत जैसी लयात्मकता होती है। यथा –
“सड़क पर चक्का जाम हो गया
ये अंजाम बहुत आम हो गया
मीडिया भगवान हो गया
देश का कर्णधार हो गया ।”
निशा भार्गव की कविताएँ सामाजिक मुददों को जीवंतता से उठाती हैं, समाधान ढूंढती हैं, व्यवस्था पर प्रहार करती हैं, लाचारी पर हँसती हैं, समाधान का मार्ग भी प्रशस्त करती हैं । यथा –
“मँहगाई ने सबका दिल तोडा
घर-घर का बजट मरोड़ा
फिर सबको दी सीख
छोडो ये शिकायत ये खीझ
समस्या का समाधान करना सीखो
बिन बात यूँ ही मत खीझो ।”
इसी तरह ‘बंटाधार’ कविता वर्तमान सामाजिक, राजनैतिक व्यवस्थाओं पर जमकर प्रहार करती है । ‘बंटाधार’ ही क्यों संग्रह को अन्य कविताओं में भी अलग-अलग प्रसंग हैं, व्यंग्य की अनूठी छटा हैं । ये कविताएँ मन को लम्बे समय तक गुदगुदाने के साथ-साथ कुछ सोचने पर भी बाध्य करती हैं ।
—डा. अमर नाथ ‘अमर’

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “Bantadhaar”

Your email address will not be published. Required fields are marked *