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Aur Ant Mein Ishu

120.00 102.00

ISBN : 978-81-89859-10-7
Edition: 2008
Pages: 124
Language: Hindi
Format: Hardback


Author : Madhu Kankariya

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Category:

Description

…और अंत में ईशु
मधु कांकरिया के प्रस्तुत नव्य कथा-संग्रह की कहानियाँ समसामयिक भारतीय जीवन के ऐसे व्यक्तिव के कथामयी रेखाचित्र हैं, जो समाज के मरणासन्न और पुनरुज्जीवित होने की समांतर कथा कहते हैं । इनमें जीवन के विभिन्न क्षेत्रों के वैसे विरोधाभास और वैपरीत्य के दर्शन-दिग्दर्शन होते हैं, जिनसे उत्पन्न विसंगतियों के ही चलते ‘दीये तले अँधेरे’ वाला मुहावरा प्रामाणिक बना हुआ है।
आज का जागरुक पाठक सर्जनात्मक कथा-साहित्य में वर्ण और नारी आदि के विमर्शों की अनंत बाढ़ की चपेट में है और ऐसे ‘हवा महलों’ के संभवत: खिलाफ भी, जो कि उसे ज्ञान जोर संज्ञान के स्तर पर कहीं शून्य में ले जाकर छोड़ देते है । इसके उलट प्रस्तुत कहानियों में जीवन की कालिमा और लालिमा, रति और यति, दीप्ति और दमन एवं प्रचार और संदेश को उनके सही-सही पदासन पर बैठाकर तोला, खोला और परखा गया है । अभिव्यक्ति के स्तर पर विचारों का कोरा रूखापन तारों न रहे, इसलिए लेखिका ने प्रकृति और मनोभावों की शब्दाकृतियों को भी लुभावने ढंग और दुश्यांकन से इन कहानियों में पिरोया है । धर्मांतरण  का विषय हो या कैरियर की सफलता के नाम पर पैसा कमाने की ‘मशीन’ बनते बच्चों के जीवन की प्रयोजनहीनता …या फिर स्त्री के नए अवतार में उसके लक्ष्मी भाव और उर्वशीय वांछनाओं की दोहरी पौरुषिक लोलुपताएँ-कथाकार की भाषागत जुलाहागीरी एकदम टिच्च मिलती है। इसे इन कहानियों का महायोग भी कहा जा सकता है ।
सृजन को जो कथाकार अपने कार्यस्थल के रूप में कायांतरित का देता है, वह अपने शीर्ष की ओर जा रहा सर्जक होता है । विश्वास है कि पाठक को भी यह कृति पढ़कर वेसा ही महसूस होगा। ऐसा अनुभव इसलिए अर्जित हो सका है, क्योंकि ये कहानियाँ जीवन के अभिनंदन पत्र नहीं, बल्कि माननीय अपमान और सम्मान की श्री श्री 1008 भी हैं।

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