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भक्त सूरदास / Bhakt Soordas

190.00 161.50

ISBN: 978-81-88121-78-6
Edition: 2017
Pages: 96
Language: Hindi
Format: Hardback


Author : Dr. Chandrika Prasad Sharma

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Description

महाकवि सूरदास ब्रतभाषा-काव्य के सर्वश्रेष्ठ कवि थे । उन्होंने श्रीकृष्ण की लीला का गान करके कृष्ण को घर-घर में पहुंचा दिया । मथुरा, वृंदावन, गोकुल तथा ब्रजभूमि की माटी के प्रति उनको अगाध प्रेम था । गोप-गोपिकाएँ, गउएँ और यमुना की कछारें उनकी इतनी पसंद आ गईं कि वे जीवनपर्यन्त उन्हें के वर्णन में रमे रहे ।
नन्द-यशोदा का आँगन, छींके पर रखा दधि-मक्खन और वृंदावन की कुंज़गलियों में सदैव अपने प्यारे कन्हैया के साथ घूमा करते थे, तभी तो इन सबका हृदयस्पर्शी वर्णन वे करने में सफल हुए । वे कृष्ण और उनके सखाओं के साथ घुलमिल गए थे । अहीर की छोहरियों को छछिया-भर छाछ पर कन्हैया को नचाते उन्होंने जी भरकर देखा है ।
बांसुरी, जो गोपियों को अपने स्वर के बूते, यमुना-तट पर बुना लेती थी और रासलीला की रस-वर्षा बनाती थी, का सूर ने जी भरकर आनंद उठाया, तभी तो वे रास-रस का इतना मोहक वर्णन कर सके । उद्धव का गोपियों को निर्गुण ब्रह्म का ध्यान करने का उपदेश सूर ने अपने कानों से सुना । ‘ऊधौ मोहि ब्रज बिसरत नाहीँ’—यह कृष्ण का कथन सूर ने भी तो गुना था, तभी तो वे अत्यंत मोहक और रोचक वर्णन करने में समर्थ हो सके ।
—चंद्रिकाप्रसाद शर्मा

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