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Gujraati Katha Sanchay

100.00 85.00

Edition: 2003
Pages: 102
Language: Hindi
Format: Hardback


Author : Dr. Jagdish Chandrikesh

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Category:

Description

कथा साहित्य ही क्या कोई भी  साहित्य किसी देश, काल और समाज की सीमाओं में आबद्ध नहीं होता, वह तो जीवन-जगत का व्याख्यान होने के नाते सार्वजनीन और सार्वभौमिक होता है । हां, इतना अवश्य होता है कि देशज व् क्षेत्रीय परम्पराएं, संस्कार, मान-मूल्य और रीति-रिवाज उसमें सहज ही अपना स्थान बना लेते है, जो उसे एक निजी पहचान देते हैं, लेकिन उसके वैचारिक या भावनात्मक आंतरिक अनुभव मात्र क्षेत्रीय न होकर भूमंडलीय होते हैं, मानवीय होते हैं । इस संचयन की प्रस्तुत कहानियां गुजरात की निजी संस्कृति की विशिष्ट पहचान बनाये रखती हुईं मानवीय संवेदनाओं की मुखर प्रवक्ता हैं, जो पाठकों से बहुत कुछ कहना चाहती हैं, साथ ही गुजराती कहानी की विकास-यात्रा के पड़ावों को भी रेखांकित करती चलती हैं ।

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