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Ekant ke Ve Pal

450.00 382.50

ISBN: 978-81-934330-8-9
Edition: 2019
Pages: 232
Language: Hindi
Format: Hardback


Author : Raniram Garhwali

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Category:

Description

एकांत के वे पल उपन्यास उत्तराखंड के पहाड़ों का सामाजिक, सांस्कृतिक परिवेश के अनेक रंगों को लेकर उपस्थित है। उपन्यास का एक-एक शब्द, एक-एक वाक्य हमारे अंतर्मन को कहीं गहरे तक झकझोरते हुए एक
गहरी तड़प, वेदना, बेचैनी, कशमकश व दर्द भरी टीस
पैदा करते हैं।
यह उपन्यास एकमात्र भारत के पहाड़ी भागों में बसने वाले लोगों के जीवन, चरित्र-चित्रण, खान-पान, रहन-सहन को ही नहीं दर्शाता बल्कि यह विश्व के सभी पहाड़ी गाँवों को अपने में समेटे हुए है। पहाड़ कोई भी हो, कहीं का भी हो, उनमें बसने वाले लोग किसी भी देश के हों। उनकी भाषा अलग हो सकती है। लेकिन उनका खान-पान, रहन-सहन, जीवन-चरित्र तकरीबन एक-सा ही होता है। उनके अपने नियम होते हैं अपने कानून होते हैं। रिश्तों की बुनियाद पर यह उपन्यास विश्व का वह समस्त जीवन अपने आप
में समेटे हुए है जिसमें तकरार है, तुनुकमिजाजी है, हँसी है, बैर होने के बाद भी जिनमें अपनापन है और वह अदृश्य
प्रेम है जो अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए पहाड़ों की अजेय दीवारों को तोड़ते हुए अपनी सारी हदें पार कर
जाना चाहता है।
खेत-खलिहान, नदियाँ, झरनेµसब एक ही जैसे तो हैं। फिर दुनिया भर के पहाड़ी भागों को हम एक-दूसरे से अलग कैसे कर सकते हैं। प्रेम यहाँ भी है तो प्रेम वहाँ भी है। बंदिश यहाँ भी है तो वहाँ भी है। बदले की भावनाएँ यहाँ भी हैं तो वहाँ भी। पहाड़ की कंदराओं में छटपटाने वाला प्रेम यहाँ भी है तो वहाँ भी है।
इस उपन्यास में प्रेम का जो वर्णन है वह पूरे विश्व का वर्णन है। एक बेहद अनूठा और कोमल प्रेम। पहाड़ों का अप्रतिम सौंदर्य ही देश की खूबसूरती होती है। सघन वनों के, बहती नदियों के, बहते खूूबसूरत झरनों के बीच जब कोई प्यार पनपता है तो उस प्यार की कल्पनाएँ, इच्छाएँ, सपने, उड़ानें असीमित होती हैं। उनकी कोई सीमा नहीं होती। मिट्टी में से जिस तरह कोई बीज फूटकर पौधे के रूप में पल्लवित होना चाहता है उसी तरह से पहाड़ों की गहराइयों में जब कोई प्यार पनपता है तो उसका कोई ओर-छोर नहीं होता। वह पनपता है और वहीं दफन हो जाता है।

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