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औरत एक रात है / Aurat Ek Raat Hai

200.00 170.00

ISBN : 978-81-88121-01-4
Edition: 2020
Pages: 152
Language: Hindi
Format: Hardback


Author : Malti Joshi

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Description

औरत एक रात है
‘नहीं, आप गलत क्यों कहेंगे? गलत तो उन्हांने कहा है, जो दीदी के अविवाहित रहने के लिए जिम्मेदार हैं। अपनी गलती छिपाने के लिए उन्होंने यह कहानी गढ़ ली है। …यह घर की बात थी, घर में ही रह जाती, तो अच्छा था; पर दीदी के बारे में ऐसा कुप्रचार हो और मैं चुप रह जाऊँ, यह तो नहीं हो सकता; तो सुन लीजिए, दीदी शादी नहीं कर सकीं, क्योंकि छोटे भैया की पढ़ाई बाकी थी और बड़े भाई ने साफ इंकार कर दिया था। वह अनब्याही रह गईं, क्योंकि घर में बूढ़ी बीमार माँ थी और उन्हें देखने वाला कोई नहीं था। वह अविवाहित रह गईं, क्योंकि मेरी परवरिष करनी थी, और सबसे बड़ी बात यह है कि उनकी शादी के लिए आज तक किसी ने पहल नहीं की और खुद अपना दूल्हा ढूँढ़ने के संस्कार हमारे परिवार में नहीं थे, इसीलिए उनकी शादी नहीं हो सकी,’ बात करते करते मेरा गला भर गया था। मैं एकदम उठ खड़ी हुई, ‘अच्छा, अब मुझे इजाजत देंगे। थैंक्स फॉर द टाइम यू गेव मी।’
‘अरे बिटिया, चाय तो पीती जाओ।’ जज साहब की पत्नी बोलीं। गृहिणियों को हमेषा मेहमानों को खिलाने पिलाने की ही पड़ी रहती है, और बातों से उन्हें कोई सरोकार नहीं होता, पर जज साहब मेरी बात समझ रहे थे। दोनों भाई मेरे साथ ही उठ खड़े हुए और मुझे छोड़ने बाहर तक आए।
(इसी संग्रह की कहानी ‘अवसान एक स्वप्न का’ से)

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