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160.00 136.00

ISBN: 978-93-83234-75-2
Edition: 2017
Pages: 80
Language: Hindi
Format: Hardback


Author : Surendra Pant

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Category:

Description

पत्थरों पर टूटता जल
आरम्भिक कविताएँ कवि के आत्मसंघर्ष का, खुद से लड़ते हुए कहीं न पहुँचने की विवशता के बीच भी अपनी पहचान बनाने की ललक से भरी तैयारी का दस्तावेज होती है । उनमें एक ओर प्रचलित काव्यविधान से टूटने की छटपटाहट होती है तो दूसरी और शास्त्र की चुनौतियों के सम्मुख कुछ नया कहने का तेवर होता है । इतना कहने का प्रयोजन यह नहीं कि सुरेन्द्र पंत की कविताएँ अन्तिम कविताएँ हैं जिन पर बहस नहीं की जा सकती । वास्तव में वे कविताएँ बहस की कविताएँ है । कारण यह कि उनमें एक गंभीर किस्म के कवि की मुद्रा सहसा किसी शब्द मा शब्दार्थ के कोने से झलकने लगती है ।
वे चाहे आज की भाषा में खुद को खोजने की कोशिशें हो पर उनमें आज और कल की कालगत धारणाओं से बचने की कोशिशें हों । इस अर्थ में वे ऐसे वर्तमान की कविताएँ है जो सदैव अमानवीय परिस्थितियों में ऐसी ही रुपाकृ्ति देता है ।

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