Sale!

Vande Matram

600.00 510.00

ISBN : 9789352661251
Edition: 2021
Pages: 182
Language: Hindi
Format: Hardback
Author : Milind Prabhakar Sabnees

Compare
Category:

Description

वंदे मातरम् ऋषि बंकिमचंद्र की अलौकिक काव्य प्रतिभा की अभिव्यक्‍त‌ि है । वैदिक काल से अर्वाचीन काल तक मातृभूमि के प्रति हमारे मन में बसनेवाले अनन्य प्रेग का अव्यक्‍त रूप यानी वंदे मातरम्! मातृभूमि के प्रति यह प्रेम शाश्‍वत है, चिरंतन है । जिस भूमि ने मुझे जन्म दिया, जिसने मेरा पालन-पोषण किया, मुझे समृद्धता दी और अंत में जिस भूमि में मैं मिल जाने वाला हूँ वह भूमि यानी यह हमारी आता, मातृभूमि! उसे हमारा शत-शत प्रणाम! भारतीय संस्कृति में महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्‍त मातृपूजन, भूमिपूजन, इस जगन्माता का पूजन इन सबके प्रतीक बने शब्द हैं ‘ वंदे मातरम् ‘! मातृभूमि के प्रति यह प्रेम प्रत्येक व्यक्‍त‌ि के मन में सहज- स्वाभाविक होता है । जैसा अपनी जननी- माता-के प्रति होता है ठीक वैसा ही!
वह प्रेम हम प्रत्येक के हृदय में है । उसपर केवल निराशा के पुट चढ़े हैं, जिन्हें दूर हटाना होगा । अंतरतम की तह से ‘ वंदे मातरम् ‘ के उच्चारण से उन्हें निश्‍चय ही दूर किया जा सकता है ।
वंदे मातरम्!!

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “Vande Matram”

Your email address will not be published. Required fields are marked *