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Shirdi Ke Sai Baba

200.00 170.00

ISBN : 9789383111282
Edition: 2013
Pages: 160
Language: Hindi
Format: Hardback
Author : Shardha Saburi

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Category:

Description

साईं सबके भीतर विराजमान हैं। साईं का अपने भक्तों से ऐसा अटूट नाता है, जो जन्म-जन्मांतर तक बना रहता है। वे माता, पिता, सखा, गुरु व अभिभावक के रूप में हर क्षण अपने भक्तों के साथ हैं। साईं की लीला न्यारी है। यदि उन्हें अपने हृदय में विराजमान करना हो तो अपने अंत:करण को लोभ, मोह, माया, क्रोध आदि विकारों से मुक्त करना होगा। हृदयरूपी बगिया में प्रेमरूपी पुष्प खिलाने होंगे। साईं की प्रतिमा को शुद्ध व पवित्र अंत:करण में प्रतिष्ठित करने के पश्चात् ही उनके अलौकिक रूप व छटा का पान किया जा सकता है। सर्वभूतों में व्याप्त साईं सकल जगत् से नाता रखते हैं। तभी तो सभी धर्मों के अनुयायी उन्हें पूरी श्रद्धा व आस्था के साथ पूजते हैं, फिर भले ही वे हिंदू हों या मुसलमान। साईं ने सदैव सत्य का प्रतिपादन किया और धार्मिक आडंबरों व कट्टर रूढ़ियों में उलझे समाज को एक नई दिशा दी।
प्रस्तुत पुस्तक में साईं बाबा के जीवन-दर्शन व संदेशों को सरल व बोधगम्य भाषा-शैली में प्रस्तुत करने का विनम्र प्रयास किया गया है। बाबा के उपदेश आज भी जनमानस को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं—दिन-प्रतिदन साईं धाम शिरडी में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या इस तथ्य की साक्षी है।
साईं की शिक्षाओं, चमत्कृत करनेवाली कथाओं एवं प्रेरणादायी उपदेशों के द्वारा जीवन पथ आलोकित करनेवाली आस्थापूर्ण पुस्तक।

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