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Safar Bawjood

140.00 119.00

ISBN : 978-81-7016-646-7
Edition: 2004
Pages: 144
Language: Hindi
Format: Hardback

Author : Siddhesh

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Category:

Description

सफर बावजूद
सिद्धेश की कहानियाँ कहानी-आंदोलन के उस दौर की उपज  हैं, जब कहानी में कलावाद की यथार्थवाद का संघर्ष चल रहा था । गुटबाजी, शिबिरबद्धता चरम पर थी । सिद्धेश  को यह शोर-शराबा पसंद न था । वे मौन भाव से सृजनरत थे । तटस्थ बने रहने का खामियाजा यद्यपि उन्हें भुगतना पडा । उनकी कहानियां फॉर्मूलाबद्ध लेखन तथा किताबी नुस्खों से मुक्त हैं । सिद्धेश ने कहानियों में शिल्पगत चमत्कार, भाषा की पच्चीकारी की जगह सहजता को महत्त्व दिया है । वे मुख्यत: नागर-मानसिकता के कहानीकार हैं, पर उनकी कहानियां सामाजिक सरोकारों से प्रतिबद्ध हैं।
संग्रह की इन कहानियों से विषयवस्तु की विविधता के साथ ही मानवीय दृष्टि और संवेदना का विस्तार है । ये कहानियाँ अपने समय और परिवेश के स्पंदनों को पहचानने की कोशिश करती हैं । मानव-मन की सूक्ष्म परख की कला  में माहिर हैं सिद्धेश । वे विचारधारा से अधिक मनुष्य और उसकी संवेदनाओं को महत्व देते हैं। उनके अनुसार, “संवेदना के स्रोत में बहने के लिए अपने चारों तरफ के परिवेश, चरित्रों और घटनाओं के प्रति सजग दृष्टि रखनी पडती है ।” सृजन को सिद्धेश ‘जीने के मकसद’ से जोड़कर देखते  । संघर्षों, अभावों से जूझते हुए ही उन्होंने अपनी रचना-दृष्टि अजित की है।
सहजता और सार्वज़निकता इन कहानियों का वैशिष्ट्य है। कहानी का रूप-गठन और रचना-विधान कुछ इस तरह है कि आधुनिक नागरिक जीवन के अनेक अनछुए तथा मार्मिक प्रसंगों का मनोवैज्ञानिक चित्रण बिना किसी अतिरंजना के यहाँ चित्रित हुआ है ।
-डॉ० श्रीनिवास शर्मा

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