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हेड ऑफिस के गिरगिट / Head Office ke Girgit

300.00 255.00

ISBN : 978-93-83233-76-2
Edition: 2016
Pages: 176
Language: Hindi
Format: Hardback


Author : Arvind Tiwari

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Category:

Description

‘हेड ऑफिस के गिरगिट’ वरिष्ठ व्यंग्यकार अरविन्द तिवारी का नया व्यंग्य उपन्यास है। उल्लेखनीय है कि इसकी पांडुलिपि पर उन्हें वर्ष 2014 का ‘आर्य स्मृति साहित्य सम्मान’ प्राप्त हुआ है।
यह उपन्यास शिक्षा, समाज और राजनीति के साथ व्यवस्था की संधियों-दुरभिसंधियों का आंतरिक यथार्थ उजागर करता है। भारतीय लोकतंत्र के विकास का एक बड़ा दायित्व शिक्षा व्यवस्था पर है। शिक्षा व्यवस्था जाने कैसे-कैसे निहितार्थों का भार वहन कर रही है। स्मरणीय है, वर्षों पहले कालजयी उपन्यास ‘राग दरबारी’ में श्रीलाल शुक्ल ने शिक्षा व्यवस्था पर बेहद तीखी टिप्पणी की थी। शिक्षा के सरोकारों या राष्ट्रीय उद्देश्यों को थोड़ी देर के लिए भूल भी जाएं तो भी प्रक्रिया, परिणाम व प्रभाव पर समयानुसार सवाल उठते रहे हैं। ऐसे ही बहुतेरे सवालों से मुठभेड़ करते हुए अरविन्द तिवारी ने यह महत्त्वपूर्ण उपन्यास लिखा है।
शहर से आठ किलोमीटर दूर बियाबान में स्थित शिक्षा विभाग के एक ‘आला दफ्रतर’ को केंद्र में रखकर लेखक ने कर्मचारियों की गतिविधियों का ‘एक्स-रे’ किया है। लेखक के अनुसार, ‘हेड ऑफिस की यह विशेषता है कि फील्ड में नाकारा साबित हुआ अधिकारी हेड ऑफिस में ड्यूटी ज्वाइन करते ही सबसे सक्षम अधिकारी बन जाता है।’ अनेकानेक चरित्रें, घटनाओं, स्थितियों, मनःस्थितियों व विचारों को ‘व्यंग्य विदग्ध’ भाषा-शैली में उपस्थित करता ‘हेड ऑफिस के गिरगिट’ पाठकीय चेतना को प्रमुदित-आंदोलित करता है। प्रारंभ से अंत तक प्रफुल्लित भाषा में लिखी यह रचना हिंदी के व्यंग्य उपन्यासों में एक सुखद वृद्धि करती है।
कथा, कौतूहल और कौतुक का सहमेल व्यंग्य उपन्यास की सबसे बड़ी कसौटी है। कहना न होगा कि यह उपन्यास इस कठिन कसौटी पर खरा उतरता है। अत्यंत पठनीय और संग्रहणीय कृति।

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