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दस प्रतिनिधि कहानियाँ : रमेश बक्षी / Dus Pratinidhi Kahaniyan : Ramesh Bakshi

200.00 170.00

ISBN : 978-81-7016-685-6
Edition: 2013
Pages: 100
Language: Hindi
Format: Hardback


Author : Ramesh Bakshi

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Category:

Description

दस प्रतिनिधि कहानियाँ : रमेश बक्षी
हिंदी के विवादास्पद एवं विख्यात कथाकार रमेश बक्षी की दस प्रतिनिधि कहानियों का यह संचयन कथाकार की उस दुनिया का साक्ष्य भी है, जिससे पैठकर वह असंभव कथ्यों को पाठक वर्ग के समक्ष उदघाटित एवं प्रकाशित करता है । आत्मबोध से उपजी इन कहानियों से लेखक का जो आत्मज्ञान झसता है, वह समकालीन स्त्री-पुरुष संबंधों के संसार को नई परिभाषा, व्याख्या और नैतिकता में रूपायित करने का समुन्नत कथा-उपक्रम है, जिसे सम्यक अर्थों में हम प्रगतिशील कथाक्रम के वर्ग से रख सकते हैं ।
ये कहानियाँ किसी विरक्त, त्यागी या सन्यासी व्यक्तित्व के विषयमुक्त होने के कथा-चित्र, नहीं है, बल्कि संबंधों के बीच पनपते उपद्रवों का सामना करते चरित्रों की सच्चाइयां है । समकालीन समाज ने अपने जीने के लिए जिस परिवेश की सृष्टि कर ली है, उसमें क्या ठोस है, क्या खोखला तथा क्या मान्य और क्या त्याज्य है-इन विषयों पर बेधक संकेत और संदेश इन कहानियों के मूल में समाहित और प्रवाहित हैं ।
रमेश बक्षी की सजग कथाकार-दृष्टि को समेटे जिन दस कहानियों को यहीं प्रस्तुत किया जा रहा है, वे हैं- ‘मेज़ पर टिकी हुई कुहनियाँ’, ‘जिनके स्थान ढहते हैं….’, ‘एक अमूर्त तकसीफ’, ‘राख’, ‘खाली’, ‘आम-नीम-बरगद’, ‘पैरोडी’, ‘थर्मस  में कैद कुनकुना पानी’, ‘अगले मुहर्रम की तैयारी’ और ‘उतर’ । संकलन के प्रस्तोता डॉ. बलदेव वंशी ने अपने इस समकालीन लेखक की कहानियों पर विस्तृत एवं आत्मीय टिप्पणी भी प्रस्तुत की है ।
आशा है हिंदी कथा-जगत का संवेदनशील पाठक-समाज अपने समय के इस महत्त्वपूर्ण कथाकार को किताबघर प्रकाशन की महत्त्वाकांक्षी  कथा-श्रृंखला ‘दस प्रतिनिधि कहानियाँ’ की एक कड़ी के रूप में पाकर निश्चय ही संतुष्ट होगा ।

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