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Dastaan Ek Jangali Raat Ki

225.00 191.25

ISBN : 978-93-80146-04-1
Edition: 2011
Pages: 170
Language: Hindi
Format: Hardback


Author : Ajeet Kaur

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Category:

Description

अजीत कौर का लेखन, जीवन की ऊहापोह को समझने और उसके यथार्थ को उकेरने की एक ईमानदार कोशिश है। उनकी रचनाओं में न केवल नारी का संघर्ष और उसके प्रति समाज का असंगत दृष्टिकोण रेखांकित होता है, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक विकृतियों और सत्ता के गलियारों में व्याप्त बेहया भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक ज़ोरदार मुहिम भी नज़र आती है।
अजीत कौर ने विभाजन की त्रासदी को झेला है। लोगों को घर से बेघर होकर, आँधी में उड़ते सूखे पत्तों की तरह भटकते देखा है, जिनमें वह खुद भी शामिल थीं। 1984 में बेगुनाह सिखों का क़त्लेआम होते देखा है। गुजरात में निरंकुश हिंसा का तांडव देखा है। अफ़ग़ानिस्तान, इराक़, रवांडा, यूगोस्लाविया, फ़िलिस्तीन में लोगों की तबाही का दर्द महसूस  किया है। साठ लाख यहूदियों के क़त्ल की दास्तानें सुनते उनका बचपन गुज़रा है। फ़िलिस्तीनियों के पीढ़ी-दर-पीढ़ी बेघर होकर रहने, उनकी तबाही और बौखलाए गुस्से से उनकी आत्मा में ख़रोंचें आई हैं। उन्हें तीखा अहसास है व्यापक भूख का-भारत में, एशिया में, सूडान में, अफ्रीका में।
उनकी कहानियों में न केवल बेक़सूर, निहत्थे लोगों के क़त्ल का दर्द है, बल्कि पेड़ों के कटने का, पंछियों के मरने का, चींटियों के बेघर होने का, नदियों के सूखने का और जंगलों की आखि़री पुकार का भी शिद्दत से अहसास है।
अजीत कौर के लेखन में यह संघर्ष और ये समस्याएँ पूरी संवेदन- शीलता, सजगता और आक्रोश के साथ प्रतिबिंबित हैं। इन सरोकारों के लिए वे सुप्रीम कोर्ट तक लड़ती भी हैं, ख़ासकर पर्यावरण और सांस्कृतिक विरासत को बचाने के लिए।
इन सरोकारों के लिए ही उन्होंने अपनी समूची पैतृक संपत्ति बेचकर और बेटी अर्पणा की पेंटिंग्ज़ बेच-बेचकर एक महत्त्वपूर्ण सांस्कृतिक संस्था एकेडेमी ऑफ  फ़ाइन आर्ट्स एंड लिट्रेचर की स्थापना की, जो संस्कृति और कला का एक बहुआयामी केंद्र है।
एकेडेमी का एक विशेष कार्यक्रम है समाज के आर्थिक रूप से कमज़ोर तथा पिछड़े वर्ग की बालिकाओं को शिक्षा देना और व्यावसायिक प्रशिक्षण द्वारा उनका आर्थिक सशक्तीकरण करना।
अजीत कौर का लक्ष्य है सार्क देशों के सही सोच वाले लोगों को एकजुट करना। इसी इरादे से उन्होंने 1987 में फ़ाउंडेशन ऑफ सार्क राइटर्स एंड लिट्रेचर की स्थापना की और सार्क देशों के साहित्यकारों, कलाकारों और बुद्धिजीवियों को एक मंच पर इकट्ठा किया है। उद्देश्य: आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर, सार्क देशों में भाईचारे और सहयोग की भावना का विकास करना।

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