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हिंसाभास / Hinsaabhas

60.00 51.00

Edition: 1993
Pages: 150
Language: Hindi
Format: Hardback


Author : Deepak Sharma

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Category:

Description

सामाजिक परिवेश में रची-बसी इस संग्रह की कहानियां आज के संघर्षरत मानव की मर्मान्तक पीड़ा का चित्रण अत्यन्त मर्मस्पर्शी तथा हृदयबेधक भाषाशैली में करती हैं। हमारे दैनंदिन जीवन में विषमता, नीरसता और विरक्ति का जो जहर घुल चुका है उससे हमें आगाह भी करती हैं। मानव-मानव के बीच बढ़ती विषमता और कटुता की खाई को यदि समय रहते पाटा न गया, और सौहार्द व सद्भाव की भावना को न रोपा गया तो हम विघटन और विनाश की जोखिम-भरी जिन्दगी जीने के लिए बाध्य होकर रह जायेंगे।

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