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बोधिचर्यावतार / Bodhicharyavatar

100.00 90.00

Edition: 1994
Pages: 144
Language: Hindi
Format: Hardback

Author : Acharya Shanti Dev

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Category:

Description

‘बोधिचर्यावतार’ भक्ति कनैं श्रद्धा रे भावां रे उमंगां कनैं-कनैं आचार्य जी जो इक पढ़ेया-कढ़ेआ दार्शनक बी साबत कां। आचार्य जी प्राणी मात्रे तांईं मंगलकारी चिन्तन करां। तिन्हां री अमरबाणी ए: कोई दुःखी ना रैहे, कोई बमार ना पौये, कोई पापी ना बणे, कोई दीन-हीण ना होये, कोई हारेया ना रैहे कनैं कुसी रे मने च बुरे बचार नीं रैहन्। सभना जो बोधिचित्ते रा लाभ मिलो।

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