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देवता का हार / Devta Ka Haar

150.00 135.00

Pages: 132
Language: Hindi

Author : Ved Prakash Kamboj

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Category:

Description

देवता का हार एक खानदानी बेशकीमती दुर्लभ हार फिल्म शूटिंग से रहस्यमयी ढंग से चोरी हो जाता है और रघुनाथ के माध्यम से केस विजय दी ग्रेट के पास पहुंचता है। इस उपन्यास में विजय अपने पूरे रंग में है। सस्पेंस और विजय-रघुनाथ की चुहलबाजी से लबरेज ये उपन्यास बेहतरीन है। “नीलम जासूस कार्यालय”की स्थापनालाला श्री सत्यपाल वार्ष्णेय ने आज से 60-65 साल पहले की थी। ये 1960 के दशक की एक बहुत मशहूर प्रकाशन संस्था रही है।

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