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अलफांसे / Alfaanse

150.00 135.00

Pages: 114
Language: Hindi

Author : Ved Prakash Kamboj

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Category:

Description

अलफ़ान्से विजय को उसके अपने ही फ्लैट में क़ैद करके वो उसे ऐसे ही छोड़ जाता है—भूखा-प्यासा! लेकिन फ्लैट से कुछ भी गायब नहीं होता। अलफ़ान्से विजय के घर पहुँच जाता है। विजय की माताजी और ठाकुर जी से मिलता है। रघुनाथ परेशान और रैना हैरान! अलफ़ान्से और विजय दोनों ही अपने पूरे रंग में। “नीलम जासूस कार्यालय”की स्थापनालाला श्री सत्यपाल वार्ष्णेय ने आज से 60-65 साल पहले की थी।

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